शायरी

#लोग कहाँ #कदर करते हैं #जज्बातों की 

इसलिये #किसी के भी आगे #दिल खोलंना छोड़ दिया 

       और #सफाई #देना तो #दूर की #बात हैं 

        #हमने तो #अपने #हक में भी #बोलना छोड़ दिया

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