शायरी

💞तुझे चाहकर क्यों किसी की चाह करूं
💞तुझे भूलकर क्यूँ खुद को तबाह करूं
💞तू जिन्दगी नही इश्क है मेरा💞
💞क्यों और किसी और को सोचकर ये गुनाह करूं,

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