शायरी

मैं आदत हूँ उसकी,  
वो "ज़रूरत" है मेरी.......

मैं फरमाइश हूँ उसकी, 
वो "इबादत" है मेरी........

इतनी आसानी से कैसे, 
निकाल दूँ उसे "अपने दिल" से.......

मैं ख्वाब हूँ उसका, 
वो "हक़ीक़त" है मेरी........

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