शायरी

जहाँ तुम हो, 
वहीँ मैं हूँ !

तेरे "ना होने" से लगता है, 
मैं क्यूँ हूँ !

तू ही मेरा "कल",,, 
तू ही मेरा "आज",,,

सुबह की "करवटों" सी जो है! 
शाम की "हरकतों" सी जो है! 

बात भी "फुरसतों" की जो है! 
वही "तुम" !!

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